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सास बहू का रिस्ता——

सास बहू के रिस्ते में सदियों से चली आ रही कड़वाहट आज भी क्यों है? जहाँ सास समझदार पड़ी लिखी है,
वहाँ बहू नासमझ व कड़वा बोलने बाली है । आखिर यह रिस्ता कभी बदल पाएेगा या नहीं ?
सास को माँ का ओहदा दिया जाता है,पर सिर्फ़ दिखावे के लिये,आखिर क्यों ?
क्या बहू कभी सास को माँ समान प्यार व सम्मान दे पाएेगी?
आज समय बदल गया है,दोनो ही पड़ी लिखी समझदार हैं,फिर भी यह अन्तर क्यों नहीं बदल पा रहा है ?

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