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अयोध्या नगरी:— पाँच – ( ५ ) जैन तीर्थंकरों का जन्म स्थान है:—-
मंगल- धुन———-

सबसे बढ़कर है नवकार करता है भवसागर पार ।
ासबसे पहले प्रात: गेस्ट हाउस में सब क्रियायों से निवर्त होकर विशाल क्षेत्र में फैले हुये इस विश्वविद्यालय का कार द्वारा क्रमबध घूमना शुरू किया।एक साइड में अनेकों विद्यार्थियों के लिये रहने के लिये बहुत सारे होस्टल बने हुये हैं।दूसरी साईट में अनेकों विभिन्न विषयों की पढ़ाई के लिये अनेकों फ़ैकल्टीज के विशाल भवन बने हुये हैं।इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के गैम्स के लिये अनेकों फ़ील्ड एवं दर्शकों के लिये साथ में दर्शक दीर्घाये बनी हुई हैं।कुछ लेनों में पढ़ाने बाले प्रोफ़ेसरों के लिये निवास स्थान बने हुये हैं।कैम्पस में चारों ओर बड़े बड़ें वृक्ष एवं पार्कों के हरियाली के दर्शन होते हैं।अनेकों स्पोर्ट्स ऐकेडमी एवं एन. एन. सी. आदि के विभाग देखने को मिले।इस सुन्दर वि्श्वविध्यालय की वातावरण मनमोहक एवं विद्या अध्ययन के लिये प्रोत्साहित करता है।अत: एक घंटा कार द्वारा बी.एच.यू. कैम्पस घूमने के पश्चात गेस्ट हाऊस बापिस आकर नास्ता करके,पुन: दूसरे विख्यात पार्श्वनाथ विद्यापीठ आई.टी.आई.रोड करौंदी,वाराणसी पहुँचे।यह स्थान कैम्पस से लगा हुआ कुछ ही दूरी पर है।यह विद्यापीठ काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त है।यहाँ पहुँच कर मुझे एक अद्भुत ६६ वर्ष पूर्व स्मृति के आनन्द का आभास होने लगा।यहाँ के प्रबन्धक श्री शुक्ला जी से भेंट करके इस अनूठे जैन दर्शन के शोध करने के विषय पठन पाठन एवं जैनधर्म व जैनदर्शन से सम्बन्धित
In this adventurous journey of East Cost America USA from California with our daughter and her family,we travelled by Taxi from her house in Cupertino city to the Air Port of San Francisco on 3rd
Niagara Falls is located in a city in Niagara County,New York,United States.It is 409 miles from New York city and 6 hour 22min away from the New York.Niagara Falls USA consists of two waterfalls on the Niagara River,which marks the border between New York and Canada: the American Falls,located on the American side of the border and
१- अनित्य भावना:—- नश्वरता का बोध—–
हे आत्मन् ! विचार कर जिस प्रकार खिला हुआ फूल मुर्झा जाता है,अन्जिल का जल बूँद-बूँद टपककर समाप्त हो
भगवान महावीर का अहिंसा धर्म एक उच्च कोटि का आध्यात्मिक एवं सामाजिक धर्म है। यह मानव जीवन को अन्दर
आत्म-कल्याण कैसे हो:——
जैन धर्म दृढ़तापूर्वक कहता है कि मैल आत्मा पर लगा हुआ होता है।अत:दुनियाभर के तीर्थों में क्यों भटका जाय? सबसे बड़ा तीर्थ तो अपनी आत्मा ही होती है। क्योंकि उसी में अहिंसा और प्रेम की निर्मल धाराएँ बहती हैं।उसी में पूर्ण डुबकी लगा लेने से













