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प्यारी सी बिटिया डौली की सदा बहार साठ (६०) वीँ जन्म दिन पर सहृदय पूर्वक हार्दिक शुभकामना के साथ मम्मी पापा का ढेर सारा प्यार दुलार:—-

” होनहार विरवान के होत चीकने पात” बाली कहाबत डौली बिटिया के शुभ जन्म आगमन के साथ धीरे धीरे प्रगट होने लगी थी।

जन्म से ही सुन्दर सुडौल रंग रूप से माँ बाप एवं सम्पूर्ण परिवार को आकर्षित करती रही और सभी की ख़ुशियों से झोली भरती रही।हम लोग सोचते थे कि हमारे घर आँगन में लक्ष्मी एवं सरस्वती का आगमन हो गया है।जैसे जैसे प्यारी सी डौल गुड़िया बड़ी होती गई,वैसे वैसे अपनी तीक्ष्ण बुद्धि एवं प्रतिभा का आभास कराती रही।जब बिटिया २ या २ १/२ बर्ष की हुई तब से ही ईगंलिश 
की पोयम किताबों की तसबीर देखकर फटाफट बिना झिझक के सुनाना शुरू कर दिया करती थी।उस ज़माने में बहुत कम बच्चे 
ईगंलिश मीडियम स्कूल में पड़ते थे।इसकी बजह से मेरे परिवार में सभी लोग डौली बिटिया को बहुत प्यार एवं उसकी तीक्ष्ण बुद्धि की तारीफ़ करते थे।डौली जैसे जैसे बढ़ी होती गई वैसे वैसे मेरा व्यापार भी बड़ता गया।हम लोगों के लिये तो इस प्यारी सी डौली बिटिया ने हमारी समृद्धि के सब द्वार खोलने का रास्ता  अपने भाग्य से दिखा दिया।अब इस डौली बिटिया के जीवन की प्रफुल्लित करने बाली घटनायें  इसकी मम्मी की ज़ुबानी देखें।  
                “फूलों से महके सदा जीवन तुम्हारा,ख़ुशियाँ चूमे हर क़दम तु्म्हारा।
                 इस जन्म दिन पर चमको तुम सितारों की तरह।।”
                 जन्मदिन की शुभकामनाओं के साथ स्वीकार करो स्नेह हमारा, बार बार यह दिन आए ।।
                 “जिस घर में बिटियाँ होती हैं,रोशनी हर पल रहती है”
                 “जेसे खिले फूल आँगन में,तुम आ खिली मेरे आँगन में ।
                   महके जैसे ख़ुशबू फूलों की,वेसे ही महकाती ख़ुशबू  बिटिया की।।
 
 
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आत्मकीर्तन—-रचनाकार—श्री मनोहरलाल सहजानन्द जी वर्णीm

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हूँ स्वतन्त्र निश्चल निष्काम,ज्ञाता दृष्टा आत्म राम।
में वह हूँ जो हैं भगवान,अन्तर यही ऊपरी जान,
वे विराग यहाँ राग वितान।
मम स्वरूप हैं सिद्ध समान,अमित शक्ति सुख ज्ञान निधान,
किन्तु आस वस खोया ज्ञान,वना भिखारी निपट अज्ञान।
सुख दुख दाता कोई न आन,मोह राग ही दुख की खान,
निज के निज पर कोपर जान,फिर दुख का नहीं लेश निशान।
जिन शिव ईश्वर ब्रम्हा राम,विष्णु बुद्ध हरि जिनके नाम।
राग त्याग पहुँचू निज धाम,आकुलता का फिर क्या काम।
होता स्वयं जगत परिणाम,में जग का करता क्या काम,
दूर हटो परिकृत परिणाम,याचक भाव रखूँ अविराम।।
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Glimpses of the amazing journey to GOA:—

This is my first occasion,when our daughters and son family assembled at the occasion of Holi and celebration of first birthday of Sriyans,the son of my granddaughter Sanjana.All family members arrange Air Flight Indigo from New Delhi to GOA.With this preplanned program,we all our family members assembled at Delhi on 6th.of March 2020 and started our journey by Air Flight collectively in the morning time from New Delhi to Goa and we all members reached at Goa Airport with in three hours about Eleven Thirty A.M.From the Goa Airport we all members have reached at The Lalit Golf &

Spa Resort Goa by Taxi.It was the two hours journey from Airport to Resort.We all we’re stayed at the Resort Rooms.It was a pleasant amazing family get together assembly at the time of Holly Festival in Goa.All our family members have a ten rooms pre-planned reservation in the same one wing of the Resort.So all of us stayed in these spacious big luxurious rooms.There is balconies behind these rooms and there is big lawn touching them.The hole Resort property surrounding mainly
garden lowns,golf course and  access to the beach.The entire Resort is landscaped beautifully.The Resort is beautiful,not only construction,but also the surroundings,gardens and beach.The rooms are
spread over a long part of the property,put at the same time all connected to the lobby.The Resort has a colonial decoration,beautiful corridors,beautiful entrance to the rooms.It looks little old,but this make them unique.This Resort is very big and  make a lot of people at the same time,but offer you
tranquility,pease,harmony.It is a paradise and is practically almost deserted,beautiful beach  with clear
and wonderful  water,heaven on earth.Nice place to relax and enjoy with family.

This Goa is located in the western region of India.The state shares its borders with the Arabian Sea to the west Maharashtra to the north and Karnataka to the South and the East.It is traditionally known as a tourist paradise for it’s natural scenery,unique beaches and cultural diversity.Goa is a state on the southwestern coast of India within the region known as the Ko.                    nkan.Formation of this state on 30 th.May 1987.Here the largest city-Vasco Da Gama and the Capital is called Panji (Panjim)Goa has been divided into two districts,called North Goa and South Goa.The commercial Capital is called Margo.
Palolem Beach is a strech of white sand on a bay in Goa,south  India.Il is known for its calm waters and ils nightlife,including ” Sound Discos” where   Party goers we’re headphones,lined with palm trees and colourful wodden shacks, the Beach faces Canacona island,known for its resident monkeys— city Canacona.
We all family members (counting about twenty ) we’re stayed in the same Resort,as the pre-planned reservation of the rooms collectively in the one wing.We all family members were stayed here from 6th.of to 11th.of March 2020. All the elderly family members used to gather together to have morning tea in the back side of the rooms. It was the best time of the day as all of us used to gossip and have fun. 
 
After that beautiful morning tea session, we used to meet again for buffet at the restaurant which was at the centre of the scenic hotel. 
 
We also celebrated Holi in Goa. The hotel had arranged an amazing Holi party at the shack for all the guests. The ambience was mesmerising. They played lovely songs and served Thandai. Colours offered by them were also organic. 
 
We were really happy to be together for a couple of days and enjoyed a lot. The only best part of 2020 until now has been this trip. Hope to be with my lovely family again very soon. 
 
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कर्नाटक प्रान्त में स्थित “हम्पी” की यात्रा के सुखद पलों की झलकियाँ :—-

यह यात्रा हमने  अपनी दोनों बेटियों ( आरती गुप्ता  एवं  कविता अग्रवाल ) के परिवार के साथ  दिसम्बर माह २०१९ के  तीसरे सप्ताह में प्रारम्भ की थी।हम्पीकर्नाटक  के पूर्वी हिस्से में  तुगंभद्रा नदी के तट पर स्थित है।यह  बैंगलोर शहर से  ३७६ किलोमीटर  और  हैदराबाद शहर से ३८५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।यहाँ का रेलवे स्टेशन  होस्पेट है,जो किहम्पीसे  १३ किलोमीटर दूर है।हम्पीमध्यकालीन  हिन्दू  राज्य विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी।तुगंभद्रा नदी के तट पर  स्थित यह नगर  पम्पा के नाम से भी जाना जाता है  और  अब केवल खंडहरों  के रूप में  अवषेश है इन्हें  देखने से प्रतीत होता है कि किसी समय में यहाँ  एक समृद्धशाली  सभ्यता निवास करती
होगी। भारत के कर्नाटक राज्य में स्थित यह नगर यूनेस्को  के विश्व के विरासत स्थलों में शामिल किया गया है। प्रतेक वर्ष यहाँ हज़ारों की संख्या में पर्यटक एवं तीर्थंयात्री आते हैं।हम्पीका विशाल फैलाव टृोल चट्टानों के टीले
में विस्तृत है।घाटियों और टीलों के बीच पाँच सौ से अधिक समाख्या चिन्ह हैं।इनमें मन्दिर, महल, तहख़ाने जलखंडहर,पुराने बाज़ार ,शाहीमन्डप, गड़ ,चबूतरे आदि असंख्य इमारतें हैं।
 “हम्पीमें विठाल मन्दिर परिसर निसन्देह सबसे शान्दार स्मारकों में से एक है।इसके मुख्य हाल में लगे ५६ स्तम्भों को 
थपथपाने पर उनमें संगीत लहरियाँ निकलती हैं।हाल के पूर्वी हिस्से में प्रसिद्ध शिलारथ है,जो वास्तव में पत्थर के पहियों से चलता था।हम्पीमें ऐसे अनेक आश्चर्य हैं,जैसे यहाँ के राजाओं को अनाज,सोने और रूपयों से तोला जाता था और उसको ग़रीब लोगों में बाँट दिया जाता था।इसके अतिरिक्त कमल महल और जनानखाना आदि भी ऐसे 
आश्चर्यों में शामिल हैं। रानियों के लिये बने स्नानागार ,मेहरावदार गलियारे ,झरोखेदार छज्जों और कमल के आकार के फ़व्वारों  से सुसज्जित होते थे।एक दोमंज़िला स्थान जिसके मार्ग में ज्यामितीय  ढंग से बने हैं और धूप हवा लेने के
लिये किसी फूल की पत्तियों की तरह बने हुऐ हैं और शहर के शाही प्रवेशद्वार पर हज़ारा राम मन्दिर बना है।
             अब हम सबहम्पीनगर में पहुँच के पश्चात  पहले से बुकिंग के द्वारा एक सुन्दर होटल ( Evolve nanu’s tutorial videoBack,Hampi now called ‘Orange County Hampi’Best Luxury Resort में ठहरने के लिए निश्चित किया।
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कर्नाटक प्रान्त के दूसरे बड़े मशहूर शहर "मैसूर" एवं "बँगलौर"की सुखद यात्रा की झलकियाँ :—

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कर्नाटक प्रान्त पर्यटक की दृष्टि से एक महत्व पूर्ण एवं साँसकृतिक रूप से सम्पन्नमशहूर शहर की यात्रा की सुखद झलकियाँ :–

        श्रवणवेलगोला में विंध्यागिरि स्थित जैन धर्म अद्वितीय एवं मशहूर पवित्र भगवान गोमटेश्वर बाहुवली के विधि विधान से पूजा पाठ करने एवं अनेकों जैन धर्म के अनुयाईयों की तपस्यास्थली की पवित्रता का आध्यात्मिक आनन्द लेने के पश्चात,अपनी दोनो बेटियों के परिवार के साथ माह मार्च २०१९ के तीसरे सप्ताह में ,अपनी यात्रा के दूसरे पड़ाव मैसूर शहर के लिये रवाना हो गये।मैसूर शहर श्रवणवेलगोला से ८० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।यह शहर पर्यटन की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण है।इस शहर में सबसे ज़्यादा पर्यटक दशहरा उत्सव के समय में बहुत आते हैं,क्योंकि दशहरा उत्सव यहाँ बड़े राजसी ठाठवाट के साथ मनाया जाता है।इस समय वाडियार राजपरिवार की तरफ़ से बड़े शान शौक़त से हाथियों की एवं सुन्दर झलकियाँ के साथ सवारियाँ निकाली जाती हैं।मैसूर महल एवं आसपास के स्थलों,जैसे जगमोहन प्लेस ,जय लक्ष्मी पैलेस एवं ललित महल आदि रमणीक स्थानों पर बारह महीने बड़ी चहल पहल एवं त्योंहारों जैसा वातावरण रहता है।

महाराजा पैलेस का राजमहल मैसूर के कृष्ण राज वाडियार चतुर्थ ने बनवाया था।इससे पहले का राजमहल चन्दन की लकड़ियों से बना हुआ था।एक दुर्घटना में इस महल की बहुत क्षति हो गई थी,इसके पश्चात इसी स्थान पर दूसरा महल बनवाया गया था,फिर इसी स्थान पर एक संग्रहालय भी बनवाया गया था।अब उसी स्थान पर पहले से अधिक सुन्दर एवं आकर्षित महल बना हुआ है।अब हमने दूसरे पड़ाव की सुखद यात्रा को आगे बजाते हुये इस राजमहल के साथ दूसरे दर्शनीय स्थल जैसे टीपू सुल्तान का महल,वृन्दावन गार्डन,प्रसिद्ध चिड़ियाघर  एवं चामुण्डा पर्वत पर महिषासुर की प्रतिमा एवं जी आर एस फैंटेसी पार्क या अम्यूजमेंट पार्क आदि को देखने का प्रोग्राम बनाकर शुरू किया।यह नगर अति सुन्दर एवं स्वच्छ है।इसमें रंग विरंगे पुष्पों से युक्त बाग़ बगीचों की भरमार है।अनेकों दर्शनीय स्थानों के आकर्शणों के कारण ही इस शहर को पर्यटकों का स्वर्ग कहते हैं।यहाँ का मैसूर पैलेस द्रविड़ और रोमन स्थापत्य कला का अद्भुत संगम है।नफ़ासत
से घिरे सलेटी पत्थरों से बना यह महल गुलाबी                 रंग के पत्थरों के गुम्बदों से सज़ा है।यह गुम्बद सोने के पत्रों से सज़ा है।यह सूरज की रोशनी में ख़ूब जगमगाते हैं।यहाँ पर ८४ किलो सोने से सज़ा एक लकड़ी का हौद भी है।दशहरे के उत्सव पर इसको हाथी के ऊपर रख कर राजा की सवारी निकली है।अन्दर घूमने पर हम लोगों को एक विशाल कक्ष मिला,जिसके किनारे गलियारे में थोड़ी थोड़ी दूरी पर स्तम्भ बनें हुये हैं,इन सतम्भों एवं छतों पर बारीक सुनहरी नक़्क़ाशी है।दीवारों पर क्रम से अनेक चित्रों से सजी हुई हैं,यह चित्र सभी वाडियार परिवार के हैं।कक्ष के बीचों बीच छत नहीं है और ऊपर गुम्बज हैं,जो रंग विरंगे काँचों से सजे हुये हैं।इन रंग विरंगे काँचों का चुनाव ,सूरज और चाँद की रोशनी को महल में ठीक प्रकार से पँहुचाने के लिये किया गया है।और हफ़्ते के आख़िरी दिनों में,छुट्टियों एवं दशहरे के उत्सव पर महल को बिजली की रोशनी से एवं सजावट के अनेक उपकरणों से ऐसे सजाया जाता है कि आँखें भले ही चौंधिया जांय,लेकिन नज़रें उनसे नहीं हटती हैं।बिजली के ९७००० बल्व महल को एेसे जगमगा देते है जैसे चाँदनी रात्रि में जगमगाते हैं।जगमगाती रोशनी में महल की सुन्दरता अद्भुत रहती है।दूसरे दिन हम लोगों ने जी आर एस फैन्टेसी पार्क या अम्यूजमेंट पार्क,जो कि ३० एकड़ में फैला हुआ है ,घूमने का आनन्द लिया।इस पार्क के मुख्य आकर्षण पानी के खेल,रोमांचक सबारी और बच्चों के अनेकों
प्रकार के खेल तमासे सबको बहत आकर्षित। करते हैं।इसके पश्चात हम सब लोगों ने मैसूर के दक्षिण से १५ किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित चामुण्डेस्वरी के मन्दिर के दर्शन करने के लिये रवाना हो गये।यह मन्दिर माँ दुर्गा जी को समर्पित है,इस मन्दिर का निर्माण १२ वीं शताब्दी में किया गया था।यह मन्दिर माँ दुर्गा जी की,राक्षस महिसासुर के ऊपर विजय का प्रतीक है।पहाड़ी की चोटी से मैसूर शहर का बड़ा मनोरम दृश्य दिखाई पड़ता है।पहाड़ी के रास्ते में काले पत्थर से बना
नंदी बैल के भी दर्शन होते हैं।इस रास्ते में बहुत से इम्पोरियम भी हैं,इनके अन्दर चन्दन से बनी हुई सुन्दर वस्तुयें,सुन्दर मैसूर की साड़ियों आदि अनेकों ख़ूबसूरत वस्तुयें मिलती हैं।

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भारतवर्ष के दक्षिण में स्थित केरल प्रान्त के तिरुवनन्तपुरम ( मलयालम भाषा मेंउच्चारण )यात्रिवेन्द्रम की आनन्ददायक एवं सुखद यात्रा की झलकियाँ :—

में एवं मेरी पत्नी बहुत भाग्यशाली हैं कि हम अपनी दोनो बेटियों आरती गुप्ता एवं कविता अग्रवाल एवं दोनों दामादों के साथ इस यात्रा की शुरूबात इलाहाबाद (प्रयागराज ) ब्रह्मरौली एेरोड्रम से तारीख २४ दिस्मबर २०१९ को न्यू देहली के लिये रवाना हुये।यहाँ पहुँच कर प्रिय बेटी संजना अग्रवाल (जैन) के दिल्ली कालका जी निवास स्थान पर पहुँच कर रात्रि विश्राम किया।अब प्रात: ५ बजे तारीख २५ को न्यू देहली ऐरोड्रम के लिये रवाना होकर केरल की राजधानी तिरुवनन्तपुरम ३घंटे की हवाई यात्रा Vistara Air Flight के द्वारा करीवन प्रात: १० बजे अपने मुक़ाम पर पँहुच गये।यहाँ से हम सभी लोग पहले से निश्चित स्थान (UDS) Uday Samudra Hotel पहुँच गये। This is a Leisure Beach Hotel and it means rising Sun n Sea.It has Ocean Spa,Ayur Ashram and Swimming Pools.This City is called the land of Gods and Coconuts.यह शहर समुद्र के किनारे बसे होने के साथ बहुत सी बिशेषताओं के लिये प्रसिद्ध है।२५ दिसम्बर क्रिश्चियनों का बहुत महत्वपूर्ण दिवस होने की वजह से यहाँ पर बहुत रौनक़ थी । इस समुदाय के बहुसंख्यक लोगों के निवास की बजह से पूरे शहर दुल्हन की तरह से सज़ा हुआ था और रंग बिरंगी रोश्नियों से जगमगा रहा था।कुछ समय इस होटल के कमरे में आराम करने एवं दोपहर का भोजन करने के पश्चात,हम सब लोग पद्मनाभस्वामी जी के मन्दिर के दर्शन करने के लिये रवाना हो गये।यह मन्दिर भारत के केरल राज्य के तिरूवनन्तपुरम में —–रूप में विराजित भगवान यहाँ पर “पद्मनाभस्वामी”के नाम से विख्यात हैं।भारत के प्रमुख वैष्णव मन्दिरों में शामिल,यह ऐतिहासिक भगवान विष्णु का मन्दिर है।सन १७३३ई.में इस मन्दिर का पुनर्निर्माण त्रावनकोर के महाराजा ‘मार्तंड वर्मा’ने करवाया था।मान्यता है कि सबसे पहले इस स्थान पर विष्णु भगवान की प्रतिमा प्राप्त हुई थी,इसके पश्चात उसी स्थान पर इस मन्दिर का निर्माण किया गया है।इस प्रतिमा में भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन मुद्रा में विराजमान हैं।मान्यता है कि ‘तिरूवनंतपुरम’

नाम भगवान के ‘अनंत’नामक नाग के नाम पर ही रखा गया है।यहाँ भगवान विष्णु की विश्राम अवस्था को”पद्मनाभ”कहा जाता है।

इस रूप में विराजित भगवान यहाँ पर पद्मनाभस्वामी के नाम से विख्यात हैं।गिनीज़ बुक में यह संसार के सबसे स्मपत्तिशाली स्मर्द्धि हिन्दू मन्दिरों की गिनती में आता है।इस मन्दिर में दो तहख़ाने हैं।अभी तक इस मन्दिर की स्मपत्तियों को एक न्यास ( ट्रस्ट )द्वारा की जाती रही है।जिसका अध्यक्ष ट्रावनकोर के राजपरिवार का कोई सदस्य होता था।किन्तु वर्तमान समय में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने सन 1911 में इसका प्रबन्धन राजपरिवार से बापिस लेकर भरतीय पुरातत्व विभाग तथा अग्निशमन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मन्दिर के गुप्त तहख़ानों में रखी स्मपति को खोलें और निरीक्षण करके मन्दिर के रख रखाव में ख़र्च कर सकते हैं।इस मन्दिर का एक नम्बर का तहखाना खोला गया तब इस तहख़ाने में दो लाख करोड़ की स्मपत्ति का पता चला था।हाँलाकि अभी दूसरे नम्बर का तहखाना नहीं खोला गया है।भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने केरल राज्य को इसकी स्मपत्ति पर किसी प्रकार का अधिकार नहीं दिया है।

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कर्नाटक प्रान्त के विभिन्न दर्शनीय शहरों के यात्रा की झलकियाँ :—-

                  मैं एवं मेरी पत्नी अपनी दोनों बेटियों ( आरती गुप्ता और कविता अग्रवाल ) के परिवार के साथ तारीख १५/०३/२०१९को इलाहाबाद (प्रयागराज )के ब्रह्मरौली ऐरोड्रम से साँयकाल ३बजे की फ्लाईट से कर्नाटक की राजधानी बैगंरूल के लिये रवाना हुये।

अब हम सब परिवार के साथ बैगंरूल साँयकाल ६बजे पहुँच गये।वहाँ पर मेरे दामाद जस्टिस शशीकान्त गुप्ता जी की वजह से हाईकोर्ट के प्रोटोकॉल ने घूमने के लिये टैक्सी एवं ठहरने की सभी व्यवस्थाये कर रक्खीं थीं।सर्वप्रथम हमारा प्रोग्राम Jeff
के प्राचीन जैन तीर्थस्थल गोमटेश्वर भगवान बाहुबली के दर्शन करने का था।अब हम सब लोग बैगंरूल के ऐरोड्रम के गेस्टहाउस पर कुछ समय विश्राम करने के पश्चात वहाँ से सीधे टैक्सियों द्वारा श्रवणवेलगोला के लिये रवाना हो गये।यह स्थान बैगंरूल से १५८किलोमीटर एवं मैसूर शहर से ८० किलोमीटर स्थित है।यह स्थान कर्नाटक प्रान्त के हसन एवं माड्या ज़िला के श्रवणवेलगोला में स्थित है।
अब हम सब लोग यहाँ पर टैक्सियों द्वारा रात्रि ११बजे श्रवणवेलगोला के गेस्टहाउस पहुँच कर रात्रि विश्राम किया। जैसा कि सभी को विदित है कि बाहुबली जी जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषवदेव के पुत्र थे।आपके बड़े भाई श्री भरत चक्रवर्ती से युद्ध के पश्चात वह मुनि बन गए थे।उन्होंने एक बर्ष तक कायोत्सर्ग मुद्रा में ध्यान किया,जिससे उनके शरीर पर बेले चढ़ गई।एक बर्ष कठोर तप के पश्चात उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई।अंत में उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो गये
गोम्मटेशवर प्रतिमा के कारण भगवान बाहुबली जी को गोम्मटेश भी कहा जाता है।यह भगवान बाहुबली जी की प्रतिमा (मूर्ति) श्रवणवेलगोला में स्थित है और इसकी ऊँचाई ५७ फ़ुट है।इस भगवान बाहुबली जी प्रतिमा को तराशने एवं बनाने में मूर्तिकार को १२ बर्ष का समय लगा था।इसका निर्माण ९८१ई.पू. में गंगा वंश के मंन्त्री और सेनापति चामुण्डाराय
ने करवाया था।यह विश्व की चंद स्वत: रूप से खड़ी प्रतिमाओं में से एक है।ग्रेनाईट के विशाल अखण्ड शिला से तराशी गई प्रतिमा है।इस प्रतिमा के दर्शन २५ किलोमीटर की दूरी से भी होते हैं।श्रवणवेलगोला जैनियों का एक प्रमुख तीर्थस्थल है।हर बारह बर्ष के अन्तराल पर इस प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है।इसको महामस्तकाभिषेक नामक त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
अब हम सब लोगों प्रात: उठकर तैयार हुये और नास्ता करने के पश्चात विन्ध्यागिरी पर स्थित भगवान बाहुबली जी के दर्शन करने ,पूजा एवं अभिषेक करने के लिये रवाना हो गये।वहाँ पर मन्दिर कमेटी के द्वारा हम लोगों के लिये भगवान बाहुबली की पूजा एवं अभिषेक करने के लिये विशेष प्रवन्ध  करा दिया था।भगवान बाहुबली जी की विशालकाय प्रतिमा विन्ध्यागिरी पहाड़ी पर स्थित है,जिसके दर्शन पूजा अभिषेक करने के लिये ८०० सीड़िया पहाड़ी पर चढ़ कर जाना पड़ता है।अत: में एवं मेरी पत्नी इतनी ऊँची पहाड़ी पर चढ़ने में असमर्थ थे,इस लिये दो डोली करके दर्शन करने पहुँच सके।इस प्रकार सभी परिवार के लोग वहाँ पहुँच कर भगवान बाहुबली जी की पूजा एवं अभिषेक विधी विधान के साथ ,मन्दिर जी के सबसे बड़े विद्वान पंडित जी के सानिध्य में करने का सौभग्य प्राप्त हुआ। इसके पश्चात मन्दिर जी के व्यवस्थापक जी द्वारा दोपहर के भोजन के लिये मन्दिर के भोजनालय के लिये रवाना हो गये।और वहाँ शुद्ध एवं शाकाहारी भोजन का सबने आनन्द लिया।अब में श्रवणवेलगोला में स्थित गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली जी के कुछ फ़ोटो प्रस्तुत कर रहा हूँ।

झलकियाँ :—-

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