“परमेष्ठि बन्दना “
नमस्कार हो अरिहंतों को, राग – द्वेष – रिपु – संहारी ।
नमस्कार हो श्री सिद्धों को, अजर अमर नित अविकारी ॥
नमस्कार हो आचार्यो को, संघ- शिरोमणि आचारी ।
नमस्कार हो उपाध्यायों को, अक्षय श्रुतनिधि के धारी ॥
नमस्कार हो साधु सभी को, जग में जग- ममता मारी ।
त्याग दिये वैराग्य भाव से, भोग- भाव सब संसारी ॥
पाँच पदों को नमस्कार यह, नष्ट करे कलिमल भारी ।
मंगल – मूल अखिल मंगलमय,पाप- भीरु जनता तारी ॥