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उवसग्गहरं स्तोत्र

उवसग्गहरं पासं, पासं वंदामि कम्म-घण-मुक्कं ।
विसहर विसनिन्नासं, मंगल-कल्लाण-।आवासं ।१।
विसहर फुलिंगमंतं, कण्ठे धारेई जो सया मणुओ ।
तस्स गह-रोग-मारी दुट्ठ-जरा जंति उवसामं ।२।
चिट्ठउ दूरे मंतो, तुझ पणामो वि बहुफलो होइ ।
नर-तिरिएसु वि जीवा, पावंति न दुक्ख-दोहग्गं ।३।
तुह सम्मत्ते लद्धे चिंतामणि-कप्प-पाय वब्भहिए ।पावंत्ति अविग्घेणं जीवा अयरामरं ठाणं। ।४।इह संथुओ महायस ! भत्तिब्भर- निब्भरेण हियएण ।ता देव ! दिज्ज बोहिं भवे – भवे पास जिणचंद ।५
[ हिन्दी अनुवाद ]
उपसर्गों को दूर करने वाले कर्म रूपी आवरणों से मुक्त विषों (विकारों) का नाश करने वाले मंगल-कल्याण के केन्द्र
पाशर्वनाथ भगवान की वन्दना करता हूँ ।।१।।
जो मानव, अष्टादश अक्षरों वाले विषहर मंत्र का सदा स्मरण करा है उसके ग्रह- रोग – मारी, दुष्टजन- ज़रा आदि उपशान्त रहते हैं ।।२ ।।मंत्र तो दूर रहो, आपको प्रणाम करने का ही महाफल है। नरक तिर्यंचगति में ही जीव दु:ख नहीं पाता ।।३।।आपके दर्शन और श्रद्धा की प्राप्ति चिंतामणि रत्न और कल्पवृक्ष आदि से भी अधिक महत्वपूर्ण है , जिसके प्रवाह से जीव शीध्रही अजरामर स्थान को प्राप्त करता है ।।४ ।। हे महायश पाशर्व जिनचन्द्र ! भक्ति रस से लबालब भरे हृदय से में आपकी स्तुति करता हूँ । भव- भव में मुझे सदबोधिकी प्राप्ति हो।। ५ ।।

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By jagdishjain

89 years old, I am MA in History, have always been interested in politics so in the old fashioned style have been to Jail, while involved in political protests. Have studied law from Agra. Was a law secretary and was so involved in the union that didn't pass my exam. A strong follower of Jainism and have been interested in all religious discourse. Have been married since 1957; my wife has been very lucky for me who is also quite a writer and poet
Interests Reading History, writing about my family history, taking part in local politics

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