मैं एवं मेरी पत्नी अपनी दोनों बेटियों ( आरती गुप्ता और कविता अग्रवाल ) के परिवार के साथ तारीख १५/०३/२०१९को इलाहाबाद (प्रयागराज )के ब्रह्मरौली ऐरोड्रम से साँयकाल ३बजे की फ्लाईट से कर्नाटक की राजधानी बैगंरूल के लिये रवाना हुये।
अब हम सब परिवार के साथ बैगंरूल साँयकाल ६बजे पहुँच गये।वहाँ पर मेरे दामाद जस्टिस शशीकान्त गुप्ता जी की वजह से हाईकोर्ट के प्रोटोकॉल ने घूमने के लिये टैक्सी एवं ठहरने की सभी व्यवस्थाये कर रक्खीं थीं।सर्वप्रथम हमारा प्रोग्राम Jeff
के प्राचीन जैन तीर्थस्थल गोमटेश्वर भगवान बाहुबली के दर्शन करने का था।अब हम सब लोग बैगंरूल के ऐरोड्रम के गेस्टहाउस पर कुछ समय विश्राम करने के पश्चात वहाँ से सीधे टैक्सियों द्वारा श्रवणवेलगोला के लिये रवाना हो गये।यह स्थान बैगंरूल से १५८किलोमीटर एवं मैसूर शहर से ८० किलोमीटर स्थित है।यह स्थान कर्नाटक प्रान्त के हसन एवं माड्या ज़िला के श्रवणवेलगोला में स्थित है।
अब हम सब लोग यहाँ पर टैक्सियों द्वारा रात्रि ११बजे श्रवणवेलगोला के गेस्टहाउस पहुँच कर रात्रि विश्राम किया। जैसा कि सभी को विदित है कि बाहुबली जी जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषवदेव के पुत्र थे।आपके बड़े भाई श्री भरत चक्रवर्ती से युद्ध के पश्चात वह मुनि बन गए थे।उन्होंने एक बर्ष तक कायोत्सर्ग मुद्रा में ध्यान किया,जिससे उनके शरीर पर बेले चढ़ गई।एक बर्ष कठोर तप के पश्चात उन्हें केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई।अंत में उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे जीवन मरण के चक्र से मुक्त हो गये ।
गोम्मटेशवर प्रतिमा के कारण भगवान बाहुबली जी को गोम्मटेश भी कहा जाता है।यह भगवान बाहुबली जी की प्रतिमा (मूर्ति) श्रवणवेलगोला में स्थित है और इसकी ऊँचाई ५७ फ़ुट है।इस भगवान बाहुबली जी प्रतिमा को तराशने एवं बनाने में मूर्तिकार को १२ बर्ष का समय लगा था।इसका निर्माण ९८१ई.पू. में गंगा वंश के मंन्त्री और सेनापति चामुण्डाराय
ने करवाया था।यह विश्व की चंद स्वत: रूप से खड़ी प्रतिमाओं में से एक है।ग्रेनाईट के विशाल अखण्ड शिला से तराशी गई प्रतिमा है।इस प्रतिमा के दर्शन २५ किलोमीटर की दूरी से भी होते हैं।श्रवणवेलगोला जैनियों का एक प्रमुख तीर्थस्थल है।हर बारह बर्ष के अन्तराल पर इस प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है।इसको महामस्तकाभिषेक नामक त्योहार के रूप में मनाया जाता है।
अब हम सब लोगों प्रात: उठकर तैयार हुये और नास्ता करने के पश्चात विन्ध्यागिरी पर स्थित भगवान बाहुबली जी के दर्शन करने ,पूजा एवं अभिषेक करने के लिये रवाना हो गये।वहाँ पर मन्दिर कमेटी के द्वारा हम लोगों के लिये भगवान बाहुबली की पूजा एवं अभिषेक करने के लिये विशेष प्रवन्ध करा दिया था।भगवान बाहुबली जी की विशालकाय प्रतिमा विन्ध्यागिरी पहाड़ी पर स्थित है,जिसके दर्शन पूजा अभिषेक करने के लिये ८०० सीड़िया पहाड़ी पर चढ़ कर जाना पड़ता है।अत: में एवं मेरी पत्नी इतनी ऊँची पहाड़ी पर चढ़ने में असमर्थ थे,इस लिये दो डोली करके दर्शन करने पहुँच सके।इस प्रकार सभी परिवार के लोग वहाँ पहुँच कर भगवान बाहुबली जी की पूजा एवं अभिषेक विधी विधान के साथ ,मन्दिर जी के सबसे बड़े विद्वान पंडित जी के सानिध्य में करने का सौभग्य प्राप्त हुआ। इसके पश्चात मन्दिर जी के व्यवस्थापक जी द्वारा दोपहर के भोजन के लिये मन्दिर के भोजनालय के लिये रवाना हो गये।और वहाँ शुद्ध एवं शाकाहारी भोजन का सबने आनन्द लिया।अब में श्रवणवेलगोला में स्थित गोम्मटेश्वर भगवान बाहुबली जी के कुछ फ़ोटो प्रस्तुत कर रहा हूँ।



